Monday, 22 June 2020

मंगेतर


पैसे की तो कोई कमी नहीं थी। लाख रुपये महीने की सैलरी। किसी भी shopping मॉल में जाता तो सोचना नहीं पड़ता था की पसंद आयी चीज़ को खरीदूं कि नहीं।

नीरज गुड़गांव के एक MNC में software इंजीनियर था।
शादी की उम्र हो रही थी। वो अब छब्बीस बरस का हो चला था। उत्तराखंड में उसका ख़ुद का दो मंजिला मकान था। घरवालों ने एक लड़की देखी थी उसके लिए.... सुंदर, सुशील...। नीरज को भी लड़की पसंद आयी.... और लड़की को नीरज। फिर क्या था?.... दोनों परिवारों ने मिलकर रिश्ता पक्का कर दिया। रोका हो गया। परन्तु नीरज के कुंडली में दोष की वजह से शादी को दो साल बाद करने का फैसला लिया गया।

इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं थी क्योंकि लड़का जॉब कर रहा था... और शगुन अपनी बैचलर की पढ़ाई कर रही थी। दोनों को काफी समय मिल गया एक दूसरे को जानने का। उनके बीच एक नया रिश्ता , नया प्यार पनपने लगा। अपनी मंगेतर...शगुन...से office से आने के बाद वो हमेशा उससे फ़ोन पे बातें करता था। कभी कभी weekend पर दोनों प्लान करने थे तो नीरज gurgaon से रात को बस पकड़ कर मिलने चला जाता था...उत्तराखंड। ये बात परिवारों को पता नहीं थी। वैसे पता भी होता तो कोई समस्या थी नहीं।

ऐसे ही कई साल तक वो उससे बातें करता था...जब भी शगुन exams को लेकर disturb होती थी तो नीरज उसे सुलझाता था..... समझाता था। उसके हिम्मत हार जाने पर उसे प्रोत्साहित करता था... ताकि वो फिर से नई ऊर्जा के साथ लक्ष्य के लिए लड़े...पढ़े।

शगुन की मेहनत रंग लायी। सरकारी नौकरी लग गयी उसकी। एक बैंक में ब्रांच मैनेजर के पद पे। शगुन की सरकारी नौकरी लगने पर सबसे ज्यादा कोई ख़ुश था तो वो यही। शगुन ने नौकरी join किया। बातों का सिलसिला फिर भी चलता रहा। धीरे धीरे दो साल बीतने को आये और पहले से ही तय शादी का साल आ गया।

शगुन के घरवालों को अब नीरज में कोई खास दिलचस्पी थी नहीं....। क्योंकि अब उनकी लड़की की नौकरी सरकारी थी...तो उन्हें दामाद भी सरकारी चाहने लगा। वो इस बात का जिक्र शगुन से करने लगे। उन्होंने शगुन को समझाया कि सरकारी लड़का उसके लिये अच्छा है।
और ताज़्जुब की बात तो देखो ...कि वो मान भी गयी ... बड़ी आसानी से। धीरे धीरे शगुन को भी लगने लगा कि अब तो उसकी जॉब लग गयी है... तो उसे इस नीरज से अच्छा लड़का मिल सकता है।

नीरज office से आता तो पहले की ही तरह शगुन को कॉल करता। फ़ोन इग्नोर होने लगे अब। एक दिन खबर आती है कि मुझसे बात मत किया करो... घर वालों ने मना किया है।

नीरज को ये नया बहाना समझ नहीं आया।
उसने ने बहुत कॉल किये...उसे whatsapp फेसबुक जहाँ हो सकता था, वहां से try किया...पर परिणाम वही...कुछ भी सकारात्मक नहीं हुआ। वो अब हर जगह से block हो चुका था।

उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था....क्या करे...कि क्या हुआ? इधर गाँव में बात फैलने लगी कि नीरज की शादी टूट गयी। लड़की वाले ये बहाना देने लगे कि लड़का नौकरी करने नहीं देना चाहता था लडक़ी को... और उसे अभी नौकरी करने से मना कर रहा है....और भी न जाने क्या क्या।

नीरज confuse है कि हुआ क्या...? उसे अभी भी कुछ समझ नहीं आ रहा कि हुआ क्या? उसका प्यार, उसकी मंगेतर...शगुन...उससे बात क्यों नहीं कर रही? पहले तो सब ठीक था...अभी क्या हो गया उसको। वह सोच में डूबा है कि कहाँ गलती कर दी उसने..।

लेकिन नीरज के पिताजी नीरज की तरह confuse नहीं हैं। उन्हें सब साफ साफ दिखता है। दुनिया देखी है... तो दुनियादारी की समझ है। उन्हें पता है कि रिश्ता क्यों टूट रहा। वो अपने बेटे को यही बात समझाना चाहते हैं... और सही समय का इंतज़ार कर रहे हैं.....।

**(--जंग)**

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