आईने में देख खुद को वह है बहुत परेशान
गोरा कर दे हे प्रभु! कुछ ऐसा कर समाधान
मैं सुंदर नहीं हूँ, मुझको कोई आँख एक न देखता
नाक नयन सब सुंदर कर दे, हे मेरे प्रिय देवता!
पर है न वो लड़का, जो तुझे अंतर्मन से चाहता
कैसे पहचानेगा फिर जो ऐसे ही तुझे पहचानता
अमूल्य खजाना ऐसी प्रीति, जो है तेरे पास
सब वंचित होकर रहते हैं, मन में बहुत उदास
माना मेरे मन का वो करता बहुत गुड़गान
रूप रंग की मेरे वह पर कभी करता नहीं बखान
मैं चाहती हूँ वो मेरे तन की भी करे तारीफ़
इसलिए हे प्रभु दे दे मुझको सुंदर होने का वरदान
संसार बनाया है मैंने फिर भर दी इसमें है माया
क्षण भंगुर ही इसे बनाया, कितनी भी हो सुंदर काया
जो सुंदर हैं वह भी यहाँ सुन! बहुत परेशान हैं
तेरे जैसे इस जग में भी लाखों ही इंसान हैं
तुम तर्क वितर्क बहुत करते हो, बात न सुनते मेरी
जब परेशान ही रहना है, फिर काया सुंदर कर दे मेरी
मुझे कुछ नहीं पता मुझे बस सुंदर तू कर दे
जो बाद में होगा देखूंगी, फिलहाल मुझे यही वर दे
जैसी तेरी मर्ज़ी, अगर यही जिद है तेरी
कल सुबह हो जायगी सुंदर काया तेरी
दिया वरदान प्रभु चले गए, होकर अंतर्ध्यान
आईने में जाते जाते उसने किया उन्हें प्रणाम
सुबह हुई, दौड़ पड़ी, पैर आईने की तरफ हैं बढ़े हुए
आँख न खोला कुछ पल, आँख मूँद है खड़े हुए
फिर धीरे धीरे पलकों को अपने उठा रही
साथ ही मन ही मन वो प्रभु को मना रही
रूप रंग हैं उचित, उभार हैं उसके बढ़े हुए
नाक नयन सब सुंदर हैं, देख रही वह खड़े हुए
हाथ उंगलियां कोमल, है रंग है उसका गोरा
बाल उसके घने काले और नितम्ब भी बढ़े हुए
साक्षात सुंदरी स्वर्ग की लगती, हुआ खुद पर उसे गुमान
बार बार देख आईने में वह, घूम घूम करे खुद बखान
जीन्स टॉप फिर पहन लिया, और निकली फिर बाज़ार
आंखें खुली रही सबकी, जब गुज़री गली से बीच बाजार
बहुत ही खुश हो जाती वह, सबका उसपर ही है ध्यान
उन नज़रों को देखा तन पर जो कभी न देते थे कुछ ध्यान
लौट रही बाजार को वह हर्षित मन लिए
और संग में अपना यह पुलकित तन लिए
कई युवक ने देखा उसको, करते कोशिश बात का
कैसे भी हो जाय जुगाड़, इस लड़की से मुलाकात का
वह हँस देती है , प्रफुल्लित होती, चल देती है घर की ओर
सब नव युवक भी चलते पीछे पीछे घर की ओर
सुंदर है तो फेमस है वह, फेसबुक इंस्टाग्राम पर
लाखों लाइक्स आ जाते हैं, केवल इक मुस्कान पर
मैसेज हज़ारों आते हैं, सब प्रेम प्रेम से भरे हुए
हवा में उड़ने लगी है वो, है सांतवे आसमान पर
जिम जाती हो? क्या खाती हो? कैसा किया मेन्टेन
बहुत ही सेक्सी लगती हो तुम, नंबर टेन में टेन
भाव खाती, मुस्काती है, निकल आती आउट ऑफ रेस्टुरेंट
सोते वक़्त है याद वह करती, उस लड़के का कॉम्पलिमेंट
इतना अटेंशन उसने कभी नहीं पाया था
तभी तो उसका नया बदन, उसे बहुत भाया था
हुई मुलाकात उसी युवक से, जो तन की करता है तारीफ
उसे तो गज़ब ही हर्ष हुआ, हुई मोहित सुन तन की तारीफ
उंगलियां मिलीं, हाथ मिला और अब मिला नयन
रात हुई, हैं घर में दोनों, मिल भी गया बदन
बहुत प्रफुल्लित वह है, सुंदर तन पाने पर
इतने सुंदर युवक संग, यह रात बिताने पर
फिर उसे सुंदरता का मानो नशा छाने लगा
पार्टी, बार, पार्क सब जगह, नज़र जाने लगा
सबकी नज़र बदन पर उसके अच्छा उसको लगता
बुरी नज़र भी उसको मानो अब भाने लगा
युवक गया दूसरा आया, तीसरा फिर चौथा
सब करें तारीफ तन की, ढूंढ़े रात बिताने का मौका
सब आँख नाक की करें तारीफ, झुमके काजल की
साड़ी सूट जीन्स टॉप, और सुंदर पायल की
जितने मिलते सुंदर लड़के, सब तन पर ही हैं गड़े हुए
रात दिन सुबह शाम, सब बदन पर उसके पड़े हुए
बरस बीत रहा अब उसका बदन ढीला हो रहा
यौवन उसका धीरे धीरे आँखों के सम्मुख खो रहा
उसे समझ आ रहा कि सब बदन चाटने वाले हैं
वीडियो बनाया संग प्रेम में, बाहर बाँटने वाले हैं
जो मना किया इन्हें तो फिर ब्लैकमेल भी हो सकती हूँ
इसीलिये चुप रहती हूँ, यहाँ सब मुझको काटने वाले हैं
बहुत उत्सुकता होती उसको जो लाइब्रेरी में बैठा है
देख कर बहुत ही ज्ञानी लगता, पर सामान्य सा लड़का है
न सुंदर बहुत है, सुना है पर बातें सुंदर करता है
फिर मेरे पास जाने पर, वह मुझसे ही क्यों डरता है
ऐसे ही बहुत प्रतिभाशाली लड़कों से मैं दूर हूँ
घिरी हुई हूँ जिम वाले से, सामान्य लड़कों से दूर हूँ
अमीर अमीर लड़कों के संग रात बिताए मैंने
तन के बहुत पास पर मन से बहुत ही दूर हूँ
आज तक मुझे किसी ने मेरे अंतर्मन से न जाना
जिसने भी जाना बस, तन को जी भरकर जाना
बहुत अकेली हूँ अब कोई समझने वाला है नहीं
कहाँ ढूँढू सच्चा प्रेम, कोई मन समझने वाला है नहीं
कई सामान्य सी लड़कियों को जब देखती प्रेमी संग
याद आती हर रात उसे, हर लड़के के संग
उसको कोई अभी तक सच्चा प्रेमी न मिला
जो उसको कहता था अपना, किसी और बदन से जा मिला
अब बहुत परिपक्व है वह, उसे सब समझ आता है
उस दिन प्रभु की बात अब याद उसे आता है
यह माया है उसने जग को, माया से है भरा हुआ
सबको कुछ न कुछ कमी है, ऐसा उसका करा हुआ
फिर आईने के पास गयी, कई साल बीतने पर
बिनती पुनः उसी तन की की, कई साल बीतने पर
प्रभु आये, मुस्काये, दिया वरदान उसे पुराना
फिर से वह है रूप पुराने, कई साल बीतने पर
नज़र पड़ी आशिक पुराने, की बाजार में कल
दौड़ कर आया गले लगाया उसने बाजार में कल
कहाँ गई थी तुम बरसों से, मैं ढूंढ रहा तुम्हें
मिल ही गयी आज तुम, है कितना सुंदर पल
फिर उसने सब सच बताया, कितनों के संग सोई थी
कहते कहते गले लिपट वह, उस रात बहुत रोई थी
'बुरा सपना था सोचो बस', जब प्रिय ने उसके कही यह बात
बरसों बाद किसी बिस्तर पर वह बहुत सुकून से सोई थी
--जंग
#zahreelashaayar