Tuesday, 29 September 2020

MMS की शिकार युवतियाँ

होटल के बन्द कमरों से लेकर

गन्ने के खेतों तक


जाने-अनजाने

हर रोज़ कैद होती है 

एक ज़िन्दगी 


जिसका सबूत है 

मोबाइल का वो छोटा सा कैमरा


जो देख रहा होता है अपनी जिज्ञासु नज़रों से

दो बदनों का मिलन।


हवस की आख़िरी सीमा

जिसमें सिहर जाते हैं दोनों बदन

कुछ क्षण के लिए।


यदि खड़ा किया जाय

न्याय के कटघरे में 

तो

पाओगे कि 

मोबाइल का यही कैमरा ही

दोनों कटघरों में खड़ा है।


यही गवाह है 

और गुनाहगार भी।


और 

इस तरह बन जाता है

एक MMS.


MMS की शिकार युवतियाँ

झेलती हैं बार - बार


अपने जाँघों के बीच

मांस का वो लोथड़ा

जिसे उसने ही अधिकार दिया था

प्रेम में आसक्त होकर

या कि यौवन के उन्माद में


जिसे उसकी ही जाँघें

कभी

निगलना चाहती थीं


लालच के वशीभूत

यौवन के वशीभूत

विश्वास के वशीभूत ।


और वह मांस का लोथड़ा

हर रात निगलता है

अब

उसका यौवन

तन

मन

और जीवन


जबरन।


पहले एक था

अब हो गए कई बदन


जबरन।


जबरन।

--जंग

दंगा

कितने ही बच्चें, आदमी

औरतें और युवतियाँ

बलि चढ़ा दी जाती हैं

दंगे रूपी हैवान को ।


जो निगल जाता है 

मानवता को

शहर को

सेंककर

नफ़रत से उत्पन्न आग में

और इस आग से लगी 

आग की लपटों में।


हैवान... जो रहता है अदृश्य रूप में

हर इंसान के भीतर

एक छोटा सा शैतान बनकर ।


और  जब

ऐसे ही छोटे-छोटे

ढेर सारे शैतान

मिलते हैं

दूसरे शैतान से 

तो खिलखिला के हँस पड़ते हैं

और

टूट पड़ते हैं 

राह में आयी

हर वस्तु, 

औरत, 

आदमी पर

बनकर एक हैवान ।


सौ शैतानों वाला हैवान ।

दंगा रूपी हैवान ।


इन्हीं में से कोई एक शैतान

झटके से रखता है बंदूक

कनपटी पर 

और फिर वस्त्र

छोड़ देती है औरत का बदन 

और लुढ़क जाती है पैरों पर उसके

और बैठ जाती है

सिमटकर

दुबककर...


रह जाता है खुला 

बिल्कुल खुला

उसका नंगा बदन।


और फिर कुछ भेड़िये 

( जो छोटे शैतान हैं )

उसे नोंच लेते हैं

और उसके जाँघों के बीच अपना

कील ठोंक देते हैं


फिर ?

और फिर निकल जाता है 

जाँघों से उसके

खून की कुछ धार

मारकर फव्वार

और कर देती है

उस दानव का लिंग... लाल।

सड़क... लाल 

हाथ... लाल

हथियार... लाल

बस, ट्रेन, दीवार... लाल

और वह दानव निकलता

करके अपनी आँखें... लाल।


फ़िर कुछ समय बाद

सब ख़ाक हो जाता है

मिलकर आग से

उस दंगे रूपी हैवान से।



और अगले दिन 

निकलता है

मासिक धर्म में सने लत्ते सा सूरज 

लाल... 

गहरा लाल...



--जंग




Tuesday, 25 August 2020

याद आता है

 छू लेता हूँ जब भी ये गिफ्टेड इम्पोर्टेड टी-शर्ट 

एयरपोर्ट पर तुझे गले लगाना याद आता है


कितनी खुश थी तू, मानों तेरी दुनिया हूँ मैं

तेरे गालों में पड़ता प्यारा डिंपल याद आता है


ओला कैब में मेरे कंधे पे सिर रखना हौले से

फिर धीरे-धीरे मुझको तकना याद आता है


मोमोज़ खाती वो भी तीखी चटनी लगा कर

बाद में तेरा सी-सी करना याद आता है


चॉकलेट नहीं लाता तो ड्रामे करती थी कितनी

पीरियड्स में तेरा साथी बनना याद आता है


जब ऑफिस जाती थी, और मैं लेटा रहता था

दरवाजे से फ्लाइंग किस तेरा याद आता है


ये ताजे नहीं हैं, ये इतने महँगे हैं भैया!

मंडी जाना साथ तेरे सब याद आता है


तरबूज की दीवानी कहूँ तो गलत नहीं होगा

बाजी लगा कर दो किलो खाना याद आता है


और हाँ! ये पिघला कर चॉकलेट कौन खाता है?

तेरा पिघला के चॉकलेट खाना याद आता है


मूड खराब होता था तो चली जाती थी छत पर

छत पर जाकर तुझे मनाना याद आता है


जो मुझसे जुदा होना था तो लड़ झगड़ लेती

मुझसे पूछ के हाथ छोड़ना याद आता है


हो गयी है शादी तेरी, खुश रहे तू अपने घर

तेरे जाने के बाद का तड़पन याद आता है


मांस का लोथड़ा लगा है अब धड़कने के काम में

जो दिल था कभी सीने में मेरे वो याद आता है


हो रहा मशहूर 'जंग', अब ज़हरीला के नाम से

तेरे पीठ पर उंगलियों से नाम बनाना याद आता है


--जंग


Tuesday, 11 August 2020

सुंदरता एक अभिशाप

आईने में देख खुद को वह है बहुत परेशान

गोरा कर दे हे प्रभु! कुछ ऐसा कर समाधान

मैं सुंदर नहीं हूँ, मुझको कोई आँख एक न देखता

नाक नयन सब सुंदर कर दे, हे मेरे प्रिय देवता!


पर है न वो लड़का, जो तुझे अंतर्मन से चाहता

कैसे पहचानेगा फिर जो ऐसे ही तुझे पहचानता

अमूल्य खजाना ऐसी प्रीति, जो है तेरे पास

सब वंचित होकर रहते हैं, मन में बहुत उदास


माना मेरे मन का वो करता बहुत गुड़गान

रूप रंग की मेरे वह पर कभी करता नहीं बखान

मैं चाहती हूँ वो मेरे तन की भी करे तारीफ़

इसलिए हे प्रभु दे दे मुझको सुंदर होने का वरदान


संसार बनाया है मैंने फिर भर दी इसमें है माया

क्षण भंगुर ही इसे बनाया, कितनी भी हो सुंदर काया

जो सुंदर हैं वह भी यहाँ सुन! बहुत परेशान हैं

तेरे जैसे इस जग में भी लाखों ही इंसान हैं


तुम तर्क वितर्क बहुत करते हो, बात न सुनते मेरी

जब परेशान ही रहना है, फिर काया सुंदर कर दे मेरी

मुझे कुछ नहीं पता मुझे बस सुंदर तू कर दे

जो बाद में होगा देखूंगी, फिलहाल मुझे यही वर दे


जैसी तेरी मर्ज़ी, अगर यही जिद है तेरी

कल सुबह हो जायगी सुंदर काया तेरी

दिया वरदान प्रभु चले गए, होकर अंतर्ध्यान

आईने में जाते जाते उसने किया उन्हें प्रणाम


सुबह हुई, दौड़ पड़ी, पैर आईने की तरफ हैं बढ़े हुए

आँख न खोला कुछ पल, आँख मूँद है खड़े हुए

फिर धीरे धीरे पलकों को अपने उठा रही

साथ ही मन ही मन वो प्रभु को मना रही


रूप रंग हैं उचित, उभार हैं उसके बढ़े हुए

नाक नयन सब सुंदर हैं, देख रही वह खड़े हुए

हाथ उंगलियां कोमल, है रंग है उसका गोरा

बाल उसके घने काले और नितम्ब भी बढ़े हुए


साक्षात सुंदरी स्वर्ग की लगती, हुआ खुद पर उसे गुमान

बार बार देख आईने में वह, घूम घूम करे खुद बखान

जीन्स टॉप फिर पहन लिया, और निकली फिर बाज़ार

आंखें खुली रही सबकी, जब गुज़री गली से बीच बाजार


बहुत ही खुश हो जाती वह, सबका उसपर ही है ध्यान

उन नज़रों को देखा तन पर जो कभी न देते थे कुछ ध्यान

लौट रही बाजार को वह हर्षित मन लिए

और संग में अपना यह पुलकित तन लिए


कई युवक ने देखा उसको, करते कोशिश बात का

कैसे भी हो जाय जुगाड़, इस लड़की से मुलाकात का

वह हँस देती है , प्रफुल्लित होती, चल देती है घर की ओर

सब नव युवक भी चलते पीछे पीछे घर की ओर


सुंदर है तो फेमस है वह, फेसबुक इंस्टाग्राम पर

लाखों लाइक्स आ जाते हैं, केवल इक मुस्कान पर

मैसेज हज़ारों आते  हैं, सब प्रेम प्रेम से भरे हुए

हवा में उड़ने लगी है वो, है सांतवे आसमान पर


जिम जाती हो? क्या खाती हो? कैसा किया मेन्टेन

बहुत ही सेक्सी लगती हो तुम, नंबर टेन में टेन

भाव खाती, मुस्काती है, निकल आती आउट ऑफ रेस्टुरेंट

सोते वक़्त है याद वह करती, उस लड़के का कॉम्पलिमेंट


इतना अटेंशन उसने कभी नहीं पाया था

तभी तो उसका नया बदन, उसे बहुत भाया था

हुई मुलाकात उसी युवक से, जो तन की करता है तारीफ

उसे तो  गज़ब ही हर्ष हुआ, हुई मोहित सुन तन की तारीफ


उंगलियां मिलीं, हाथ मिला और अब मिला नयन

रात हुई, हैं घर में दोनों, मिल भी गया बदन

बहुत प्रफुल्लित वह है, सुंदर तन पाने पर

इतने सुंदर युवक संग, यह रात बिताने पर


फिर उसे सुंदरता का मानो नशा छाने लगा

पार्टी, बार, पार्क सब जगह, नज़र जाने लगा

सबकी नज़र बदन पर उसके अच्छा उसको लगता

बुरी नज़र भी उसको मानो अब भाने लगा


युवक गया दूसरा आया, तीसरा फिर चौथा

सब करें तारीफ तन की, ढूंढ़े रात बिताने का मौका

सब आँख नाक की करें तारीफ, झुमके काजल की

साड़ी सूट जीन्स टॉप, और सुंदर पायल की


जितने मिलते सुंदर लड़के, सब तन पर ही हैं गड़े हुए

रात दिन सुबह शाम, सब बदन पर उसके पड़े हुए

बरस बीत रहा अब उसका बदन ढीला हो रहा

यौवन उसका धीरे धीरे आँखों के सम्मुख खो रहा


उसे समझ आ रहा कि सब बदन चाटने वाले हैं

वीडियो बनाया संग प्रेम में, बाहर बाँटने वाले हैं

जो मना किया इन्हें तो फिर ब्लैकमेल भी हो सकती हूँ

इसीलिये चुप रहती हूँ, यहाँ सब मुझको काटने वाले हैं


बहुत उत्सुकता होती उसको जो लाइब्रेरी में  बैठा है

देख कर बहुत ही ज्ञानी लगता, पर सामान्य सा लड़का है

न सुंदर बहुत है, सुना है पर बातें सुंदर करता है

फिर मेरे पास जाने पर, वह मुझसे ही क्यों डरता है


ऐसे ही बहुत प्रतिभाशाली लड़कों से मैं दूर हूँ

घिरी हुई हूँ जिम वाले से, सामान्य लड़कों से दूर हूँ

अमीर अमीर लड़कों के संग रात बिताए मैंने

तन के बहुत पास पर मन से बहुत ही दूर हूँ


आज तक मुझे किसी ने मेरे अंतर्मन से न जाना

जिसने भी जाना बस, तन को जी भरकर जाना

बहुत अकेली हूँ अब कोई समझने वाला है नहीं

कहाँ ढूँढू सच्चा प्रेम, कोई मन समझने वाला है नहीं



कई सामान्य सी लड़कियों को जब देखती प्रेमी संग

याद आती हर रात उसे, हर लड़के के संग

उसको कोई अभी तक सच्चा प्रेमी न मिला

जो उसको कहता था अपना, किसी और बदन से जा मिला


अब बहुत परिपक्व है वह, उसे सब समझ आता है

उस दिन प्रभु की बात अब याद उसे आता है

यह माया है उसने जग को, माया से है भरा हुआ

सबको कुछ न कुछ कमी है, ऐसा उसका करा हुआ


फिर आईने के पास गयी, कई  साल बीतने पर

बिनती पुनः उसी तन की की, कई साल बीतने पर

प्रभु आये, मुस्काये, दिया वरदान उसे पुराना

फिर से वह है रूप पुराने, कई साल बीतने पर


नज़र पड़ी आशिक पुराने, की बाजार में कल

दौड़ कर आया गले लगाया उसने बाजार में कल

कहाँ गई थी तुम बरसों से, मैं ढूंढ रहा तुम्हें

मिल ही गयी आज तुम, है कितना सुंदर पल


फिर उसने सब सच बताया, कितनों के संग सोई थी

कहते कहते गले  लिपट वह, उस रात बहुत रोई थी

'बुरा सपना था सोचो बस', जब प्रिय ने उसके कही यह बात

बरसों बाद किसी बिस्तर पर वह बहुत सुकून से सोई थी


--जंग


#zahreelashaayar

Saturday, 8 August 2020

दिल

 दिल 

अगर तुझे बाँधकर रख सकते 

तो मैं बाँध देता 

तुझे उसके 

साड़ी के पल्लू के एक कोने से

जैसे 

वो कभी कभी 

सिक्कों को बाँधती है

उन्हीं सिक्कों के संग।


गाहे बगाहे कभी जब

वो गाँठ खोलती

सिक्कों की तलाश में

तो गिर जाता तू

जमीन पर

पट्ट से

उसे 

मेरी याद दिलाकर


--जंग


Friday, 17 July 2020

तितली

।। तितली।।

पता है?
आयी है आज
एक तितली
छत के उसी कोने पर
जहाँ बैठकर तुम मुझे
आलिंगन में लेती थी

पंख पर धारीयाँ उसके
तुम्हारी लाल चुन्नी याद है न?
बिल्कुल उसी तरह
चटकीले और ख़ुशनुमा रंगों से लबालब।

तुम्हारे होंठों से -
उसके पंख
खुलते भी उसी तरह
जब उड़ती हवा में वो

फिर कुछ देर उड़
बैठ जाती है पौधे पर
उसी पौधे पर
जो तुमने गिफ्ट किया था।

पता है?
एक फूल खिला है
वो भी लाल ही है

तुम्हें लाल रंग इतना भाता जो था
कि गिफ़्ट भी दिया था तो
लाल फूल वाला।

ये कह के दिया
'ये मेरी याद दिलाएगी तुम्हें'।

मुझे नीला पसंद था।

पर अब ना?
लाल रंग से मुहब्बत सी हो गयी है।

फ़िर उड़ कर बैठ जाती है,
उसी रस्सी पर
जिसपे तुम कपड़े सुखाती थी।

जब भी कभी कहीं
कोई रस्सी देखता हूँ
तो सिहर जाता हूँ
काँप जाता हूँ
डर जाता हूँ
कौंध कर कूद जाती है
ज़ेहन में
उस दिन की
वह भयावह रात।

कि कैसे मैं तुम्हारी हिफाज़त न कर सका
उन वहसी दरिंदों से
घायल किया मुझे
बेसुध पड़ा सड़क पर मैं।

लूट ली अस्मत।

भाग कर आया था
जब घर को मैं
झूल चुकी थी तुम
रस्सी के सहारे।

बस।

उड़ गयी है तितली
अब।
तुम्हारी तरह ही।

--जंग

Sunday, 5 July 2020

सँपोला



पीतल झुमके
सोने कंगन
ले गया कोई
अपने आंगन

नयी दुल्हन।
तन मन
धन यौवन ।

बाट निहारे
रात पिया का
खूब सोचे
बात पिया का।

आवे जब
सतावे वो
हँस हँस खूब
हँसावे वो

रात बीती
आया दिन

सुबह गई
हुई शाम

बहु रोज़ करने लगी
घर के सारे काम

सास न माने
देवे ताने

नयी बहुरिया
पाँव दबावे
सब चाव से खावे
वो रह जावे

याद आवे
बड़ा सतावे
नैयर अपने
कैसे जावे?

सास न देवे जाने
पल पल मारे ताने

बहू गुस्सावे
कुढ़ रह जावे
सास को कछु न
वो कह पावे

साल बीता
पाँच अब
गोद सूनी
आँच अब

सास के ताने
सह न पावे
बंज़र कोख
कुछ कह न पावे

आई सास की
नागिन बिटिया

गोंद में लेकर
नया सँपोला

पास गयी तो
दूर हटाओ

इस बंजर को
दूर भगाओ

साया पड़े न बेटे पर
चल हट्ट चल हट्ट चल हट्ट।

लगी कोसने
ख़ुद को
बेटा नहीं दिया
क्यों मुझको?

तेरी करूँ मैं पूजा
कोसे मुझको दूजा

रे प्रभु!
कुछ तो कर
नहीं तो
दे दे ज़हर।

समय न देती नागिन
पिया संग रात बिताने
न समझे बूझे जाने
मारे केवल ताने

कपड़े लत्ते
घर बासन
देती काम
वो बदमाशन।

रात होवे
पिया सोवे
पिया जगे तो
सोया पावे

पिया नाराज़
क्या हुआ आज?
बच्चा रोवे
क्या है राज़?

नागिन गयी बाज़ार
ससुर सास के संग
आएगी सजा के
वो नागन अपना अंग।

पिया गये बाहर।

खैर, अब

चैन सो सोवेगी
श्रृंगार करेगी

घर में अकेले
विहार करेगी

पर सो न पावे
सँपोला काँय काँय करे जावे

जी आता है
गला दबा दूँ

बाल्टी में इसको
अभी डुबा दूँ

क्या ही  अब श्रृंगार करेगी
क्या ही अब विहार करेगी

नागिन गयी छोड़ सपोला
सिर पर उसके पड़े है ओला

फ़ोन बजा
आवाज़ आयी

मर गए तीनों।

नागिन के ससुराल वाले
तोड़ गए सारे नाते
गोंद में लिया नहीं सपोला
छोड़ गए जाते जाते।

अब बहुरिया
ख़ुश है
घर में नहीं
पुरुष है

मारेगी सँपोले को
काँय काँय जो कर रहा

नागिन गयी
अब तू भी जा

लिया उठा
पालने से

क्रोध में अब
होश न अब

काँय! काँय!

काँय काँय शांत।
बिल्कुल शांत।

पिया आया
चौंक गया

उसे नहीं कुछ
समझ आया

आँख आँसू रोवे
घाव दिल के कैसे धोवे?

गया लिपट वो रोते रोते
आंसू से गाल भिगोते

घर में केवल
तीन लोग

बहू पिया और वो सपोला।

कैसे?

मार न पाई वो अभागन
ठहर गया उसका भींचा तन

क्रोध में देखा
संपोले को
रोते देखा
सँपोले को

होठों को देखा
नाक आँख अब

क्रोध ग़ायब
जगा वात्सल्य

आँख पिया पर
नाक पिया पर
गया वो बच्चा
उसके पिया पर

लगा लिया सीने से
पीठ सहला रही
वात्सल्य के आँसू से
उसको नहला रही।

लगा कि बच्चा उसका है
सपोला सच में उसका है

प्रभु ने उसकी सुन ली
कोख सूनी भर दी।

वह पालेगी।
वही है माँ।

नहीं सँपोला
मेरा बेटा है।

नहीं सँपोला
मेरा बेटा है।

--जंग