Monday, 2 May 2016

बाबा रामदेव की एक झलक

रैपिड मेट्रो से उतर कर मेरे पैर सिकन्दरपुर - फरीदाबाद टोल रोड की तरफ बढ़ रहे थे ,शेयरिंग कैब पकड़ने के लिए | जैसे ही पहुंचा तो क्या देखता हूँ की एक कैब अभी अभी सवारियों से भर के चल पड़ी | थोड़ा निराश हुआ क्योंकि सामान्यत: पंद्रह मिनट लग जाते हैं दूसरी कैब को भरने में और किस्मत खराब हुई तो आधे घंटे भी | लेकिन आज सौभाग्य से बस ५ मिनट में कैब भर गई | शेयरिंग कैब चल पड़ी ग्वाल पहाड़ी की ओर | पीछे वाली दो सीट पर हम चार बन्दे बैठे थे | हम एक मिनट चले ही थे की मेरे बगल में बैठे बन्दे नेचिल्लाया "अबे ! बाबा रामदेव " | मैं सामने ड्राइवर के शीशे से आगे की तरफ देख रहा था | मैंने बड़ी तेजी से पीछे की तरफ देखा | तब तक गाडी हमारे बगल में आ चुकी थी और हमें ओवरटेक कर रही थी | मुझे कुछ भगवा रंग का कपडा दिखा | बाबा रामदेव ठीक से दिखे नहीं | हमारे शेयरिंग कैब में अब पतंजलि की बातें होने लगी | हमारी नज़र उस स्कार्पियो पे थी जिसमे बाबा रामदेव बैठे थे | उसके आगे पीछे दो मिलिट्री जवानों से जिप्सी | आगे डी एल एफ फेज १ का रेड लाइट आया | वहाँ जाकर गाडी रुकी | हमारी गाडी पीछे वाली मिलिट्री गाडी के पीछे थी | मैं स्कार्पियो के लेफ्ट फ्रंट साइड मिरर में रामदेव को देखने की कोशिश कर रहा था ,पर निराशा ही हाथ लगी | रेड लाइट के ग्रीन होते ही सारी गाड़िया चल पड़ी | हम सबमे बातें हो रही थी की अगले रेड लाइट पर बाबा रामदेव की गाड़ी नहीं रुकेगी | पर जैसे ही रेड लाइट के पास पहुंचे तो किस्मत से लाइट ग्रीन हो गई और स्कार्पियो आगे की ओर बढ़ गई | पर हम क्या देखते हैं रेड लाइट क्रॉस करते ही स्कार्पियो सड़क के साइड हो गई और रुक गई | आगे और पीछे वाली मिलिट्री गाड़ियों से जवान उतरते हैं | अब तक हम स्कार्पियो को क्रॉस कर चुके थे | और देखते हैं की स्कार्पियो बिना सिक्योरिटी के हमारे पीछे आ रही थी | मैं पीछे की तरफ स्कार्पियो में बाबा रामदेव को सीधे देख रहा था | क्या शान से ड्राइवर के बगल वाली सीट पर विराजमान थे | हमने हाथ हिलाने की कोशिश की पर कहा ही दिखता हमारा हाथ स्कार्पियो में बैठे बाबा रामदेव को | और थोड़े ही देर में स्कार्पियो फिर से हमें ओवरटेक कर गई | आगे जाकर सड़क के किनारे खड़ी जवानों से भरी जिप्सी स्कार्पियो के आगे लग गई |और पीछे से एक जिप्सी आकर फॉलो करती है | और फिर हम उसके पीछे - पीछे | ग्वाल पहाड़ी चौकी तक यह सिलसिला चलता रहा और हमारी गाड़ी बाएं मुड़ जाती है और स्कार्पियो सीधे निकल गई फरीदाबाद की ओर | इस तरह बैठे बिठाये बाबा रामदेव के दर्शन हो गए |
----जंगबहादुर पटेल

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